दिल उदास और लब खामोश
दिल उदास है, लब खामोशजिंदगी में कहीं उम्मीद अभी बाकी है,अब अपनी गुस्ताखियों पर भी ऐतराज़ होता है, छोड़कर सभी मुझे बेगाना समझने लगे,ज़रा कोई बताये तो हमारी खता,कि बरसों चाहने का सिला क्या होता है,क्या होता है जब उनकी याद आती हैऔर मन मसोसकर रह जाता हैछोड़कर...
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चन्दन कुमार
साहित्य
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[11 May 2010 15:09 PM]



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