लड़की बिक गयी, इज्ज़त का पता नहीं , हाँ, इंसानियत तो लुट गयी।

अथाह... उसकी की माँ की बिमारी को आज पन्द्रहवा दिन था ,पिता नाम का शख्श महीनो से शराब में डूबा मग्न था,बेटा पैदा ना करने की बदला बीस साल औरत से लेता रहा ,बेटी के जन्म के गुनाह की सजा माँ को आज तक देता रहा ।बेटी उस आदमी को ऐसा करते देख बेटा होने की कल्पना करती... [पूरी पोस्ट]
writer राजेन्द्र मीणा

अबला

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[11 May 2010 13:40 PM]

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