मेढ़की और मानव-एक लोक कथा

kavyakala सुमिरन करिकै महादेव का करिकै गौरी माँ को ध्यान। एक मिचकुरी इक बुढ़ऊ का किस्सा सुन्दर करौं बखान। बुढ़ऊ जात रहैं रस्ता माँ एक मिचकुरी परी देखाय। बोली मोहिंका चूमि लेव तो मैं बनि जाउँ सुन्दरी नारि। तब हम तुम्हरी तिरिया बनिकै सगरो बुढ़ापा देहुँ निकारि। सेज... [पूरी पोस्ट]
writer Laxmi N. Gupta
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[11 May 2010 12:43 PM]

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