(नई रचना) -देस राग
Shareचूल्हे ठंडे पड़े और पेट में आग हैवाह वाह कहो न यही देस राग हैन्याय धीमा है तो ऐसा ही चलने दोहमपे हैं कई केस हम कहां बेदाग हैंसंसद स्थगित हुई चलो आराम करें हंगामा करने में भी हुई दौड़ भाग हैसिपाही मारे गए हैं!नक्सली भाग गएजंगल में लड़ाई दिल्ली में दिमाग...
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माणिक
कविता
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[11 May 2010 11:31 AM]



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