रोने गाने की आवाजें भी, कानूनों में ढलवाओगे ?

Ajnabi गहरी-गहरी बातें करना, शगल बड़ा बेरूखा हैपिछले पहर के सन्नाटों में, खुद को तन्हा पाओगेजख्मी यादें, मीठी छुरियां और रिश्ते अनजाने सबढली जवानी के सायों में, तुम भी गुम हो जाओगेरात अंधेरी, हाथ ना सूझे, लोग नींद में चलते हैंकिससे-किससे बच के चलोगे, कदम-कदम... [पूरी पोस्ट]
writer Rajey Sha

ग़ज़ल

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[11 May 2010 10:14 AM]

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