कोई उद्दाम अभिलाषा सभी प्रतिबन्ध तोड़ेगी|
अधूरी कामनाएँ अधूरी कामनाएँ फिर मेरे सपनों में आ पहुँची कोई उद्दाम अभिलाषा सभी प्रतिबन्ध तोड़ेगी| नियम के साथ क्या मन को हमेशा बाँधना होगा खुले आकाश के नीचे धरा को नापना होगा दिशाओं के निमंत्रण पर क्षितिज की माँग आ पहुँची उडानें पंछियों की फिर नए सम्बन्ध...
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Deepa Pant
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[11 May 2010 09:32 AM]



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