कोई उद्दाम अभिलाषा सभी प्रतिबन्ध तोड़ेगी|

मन वृन्दावन अधूरी कामनाएँ अधूरी कामनाएँ फिर मेरे सपनों में आ पहुँची कोई उद्दाम अभिलाषा सभी प्रतिबन्ध तोड़ेगी| नियम के साथ क्या मन को हमेशा बाँधना होगा खुले आकाश के नीचे धरा को नापना होगा दिशाओं के निमंत्रण पर क्षितिज की माँग आ पहुँची उडानें पंछियों की फिर नए सम्बन्ध... [पूरी पोस्ट]
writer Deepa Pant
views
16
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
1
[11 May 2010 09:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix