सोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलें

तीखी नज़र चलती रही रमेश की यूं ही अगर जबानदुनिया भर में देश की रोज घटेगी शानरोज घटेगी शान, इसलिए जब मुंह खोलेंसोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलेंदिव्यदृष्टि वरना मनमोहन कर लें कुट्टीबिगड़े पर्यावरण केबिनेट से हो छुट्टी... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्यदृष्टि
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[11 May 2010 09:30 AM]

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