'शायरी का हुनर'

दर्द ज़माने के, ओढ़े हुए से दिखते हैं, कतरा अपनी आँख का, समुंदर सा लगे, गुजरते पल में, सही अक्स दिखें रिश्तों के, हर बुरा वक़्त, किसी आइने सा लगे, लोग वाकिफ़ है, अंदर छुपी उलझनों से अब  ,मेरा चेहरा किसी अखब़ार के पन्ने सा लगे,तराशा इसको तो,... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश शर्मा
views
16
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
9
[11 May 2010 09:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix