मन का पंछी उड़ना चाहे

मनोज आज फिर एक सूफी गीत -- करण समस्तीपुरीमन का पंछी उड़ना चाहे,लेकिन उड़ ना पाये !हाय !किसको दर्द सुनाये !!कतरे गए पंख कोमल औरआँखें हैं धुंधलाई !धुंधली आंखो में सतरंगी,सपने बहुत छुपाये !!हाय !किसको दर्द सुनाये !!कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,किस पथ से किस नभ को जाना... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

करण समस्तीपुरी

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[11 May 2010 08:59 AM]

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