विषकन्या

कच्‍चा चिट्ठा कुछ दिन पहले मैंने एक लघु उपन्यास 'विषकन्या' की रचना की थी। उपन्यास में रहस्य और रोमांच तो है ही, साथ ही मैंने हास्य का पुट देने का प्रयत्न किया था। मुलाहिजा फरमाइयेकार में जिन्दा लाशबेला को इन्तजार करते चालीस मिनट हो गए थे। एक तो खड़े खड़े उसके पाँव दुख... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी

विषकन्या

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[11 May 2010 05:53 AM]

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