तुम ना मानो मगर हक़ीकत है, इश्क़ इंसान की जरूरत है...

एक शाम मेरे नाम अस्सी का दशक मेरे लिए हमेशा नोस्टालजिया जगाता रहा है। फिल्म संगीत के उस पराभव काल ने ग़ज़लों को जिस तरह लोकप्रिय संगीत का हिस्सा बना दिया वो अपने आप में एक अनूठी बात थी। उस दौर की सुनी ग़ज़लें जब अचानक ही ज़ेहन में उभरती हैं तो मन आज भी एकदम से पच्चीस... [पूरी पोस्ट]
writer Manish Kumar
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[11 May 2010 05:13 AM]

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