संस्मरण स्मृति शेष जब्बार ढाकवाला
संस्मरणमेरा दोस्त जब्बार ढाकवालावीरेन्द्र जैन्मैं कह नहीं सकता कि कैसे हम लोगों का परिचय दोस्ती में और दोस्ती से उस रिश्ते में बदल गया जिसे खून के रिश्ते से भी बड़ा रिश्ता कहा जाता है। सिलसिलेवार याद करने पर कुछ कड़ियाँ जुड़ती नज़र आती हैं।बात 1994 से शुरू...
[पूरी पोस्ट]
वीरेन्द्र जैन
संस्मरण
12
2
0
2
0
[11 May 2010 04:20 AM]



Shuffle








