कितने दूर, कितने पास?
वैसे भी, कहावत है ही – जर, जमीन और जोरू. जोरू याने नारी. सारे झगड़े की जड़ ये ही हैं. ये अगर दूर रहें, आदमी की जिंदगी से बहुत दूर रहें तो किसी तरह की समस्या ही न हो. महिलाएँ पुरूषों से दूर रहें तो फिर निरूपमा जैसे कांडों को सिरे से नकारा नहीं जा...
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Raviratlami
व्यंग्य
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[11 May 2010 02:57 AM]



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