प्रेम के क्षण (१)
१ काँप गई आलिंगन में उन्मुक्तता है इस बंधन में पंख लगे है धडकनों को उबरू कैसे इस उलझन से २ कितने मादक कितने मोहक नैन तुम्हारे मौन में भी कितने मुखर नैन तुम्हारेइन नैनो ने विकल किया ये तो सोये पर जागे रात रात भर नैन हमारे ३ दिन-ब-दिन तुम चढ़ रहे हो...
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Sonal Rastogi
हिन्दी पोएम
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[11 May 2010 01:45 AM]



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