संसार मृगमरीचिका के पीछे
बंशीधर मिश्र की कलम से
संसार मृगमरीचिका के पीछे भाग रहा है। मृगमरीचिका अर्थात् जो है नहीं उसका पूरी तरह आभास। ऐसा आभास कि आंखें, मन, बुद्धि सब धोखा खा जाएं। इस समय पूरी दुनिया इसी धोखे का शिकार है। अपनी ताकत की चोटी पर बैठे अमेरिका का मायाजाल उसके अपने...
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डा.सुभाष राय
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[11 May 2010 01:09 AM]



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