हिन्दू धर्म संदेश-पैसा कमाने से कभी फुर्सत नहीं मिल सकती

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका किं तया क्रियते लक्ष्म्या या वधूरिव केवला। या तु वेश्येव सा मान्या पथिकैरपि भुज्यते।। हिन्दी में भावार्थ-उस संपत्ति से क्या लाभ जो केवल घर की अपने ही उपयोग में आती हो। जिसका पथिक तथा अन्य लोग उपयोग करें वही संपत्ति श्रेष्ठ है। धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[10 May 2010 23:35 PM]

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