मधु ऋतु
दूर कहीं कोयल बोलीवीरान पड़ा था कब से गुलशनतितली, भँवरे, माली थे चुपतनहा-तनहा लगता मौसमऐसे में यह मधुबोलीदूर कहीं कोयल बोलीकलियाँ मुस्काएँगी अबबहारें आएँगी गुलशन मेंभँवरे फूलों पर मँडराएँगेंहोगी फूलों संग आँख-मिचौलीदूर कहीं कोयल बोलीखुशनुमा होगा हर...
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डॉ. राजेश नीरव
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[10 May 2010 23:32 PM]



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