संत कबीरदास के दोहे-स्वयं ठग जायें, पर दूसरे को न ठगे(sant kabir das ke dohe-khud kisi ko na thagen)

शब्दलेख सारथी कबीर आप ठगाइये, और न ठगिये कोयआप ठगै सुख, ऊपजै और ठगे दुख होयसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अगर आपको कोई ठग जाता है तो कोई बात नहीं है, पर आप स्वयं किसी को ठगने का प्रयास मत करो। हम ठग जायें तो एक तरह से इस बात का तो सुख होता है कि हमने स्वयं कोई... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[10 May 2010 23:20 PM]

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