साँझ घिर आई प्रवासी !

Unmanaa साँझ घिर आई प्रवासी ! तुम न आये, छा गयी जग पर न जाने कब उदासी ! साँझ घिर आई प्रवासी ! ह्रदय में तूफ़ान मचले, नयन में वारिद घनेरे,बढ़ गए पश्चिम दिशा में निविड़ तम के व्यस्त घेरे,तरसती है सिंधु तट पर मीन भी व्याकुल पियासी ! साँझ घिर आई प्रवासी ! चंद्रिका की... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[10 May 2010 21:11 PM]

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