कितनी बार...

नारी का कविता ब्लॉग © 2008-10 सर्वाधिकार सुरक्षित!कितनी बार...कितनी बार तुम मुझे अहसास कराते रहोगे कि मेरी अहमियत तुम्हारे घर में,तुम्हारे जीवन में मात्र एक मेज़ या कुर्सी की ही है जिसे ज़रूरत के अनुसार कभी तुम बैठक में, कभी रसोई में तो कभी अपने निजी कमरे में इस्तेमाल करने के... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[10 May 2010 21:22 PM]

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