जन्म-दिवस पर मुझे मिला एक अनमोल उपहार

सरस पायस मेरे जन्म-दिवस की सुहानी भोर मुझ पर ख़ुशियों की बरसात करने के लिए तत्पर थी, पर आभासी दुनिया में खोया बंद कमरे में बैठा मैं बाहर निकल ही नहीं पा रहा था!- "अंकल! अंकल!" -अचानक एक सुरीली आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया!दरवाज़े पर मेरी भतीजी दिव्या... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

रश्मित्

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[10 May 2010 14:56 PM]

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