कवि अगर रसोइया भी हो!
इधर कुछ दिन से व्यस्तता के साथ कुछ तनाव सा था. वैसे भी अप्रैल-मई में संस्थान के कार्याधिक्य के कारण तनिक ज्यादा दबाव तो सिर पर रहता ही है. लेकिन गत दिनों एक संगोष्ठी के अवसर पर जबसे दोस्तों ने आँख में अंगुली दे-देकर दिखाया कि डॉ. गोपाल शर्मा के लीबिया...
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ऋषभ Rishabha
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[10 May 2010 12:55 PM]



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