एक गुन्चा, एक पेड़

साए तले दरख़्त के, इक नया पौधा खिला खुश हुआ दरख़्त, चलो एक साथी तो मिला !परवान पौधा चढ़ा, उस पेड़ के ही साए में,आँधियों में लिपटा कभी, सर्दियों में सिमटा उसमे,धूप झुलसाती तो, पत्तियां पेड़ की मरहम बनतीछाँव उसकी, गुन्चे के खेल का आँगन बनती,धीरे धीरे एक दिन,... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश शर्मा
views
15
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
9
[10 May 2010 11:29 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix