हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगे
शाम अधूरी मीत याद बिन उसनींदे दिन मीत साथ बिन !***********हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगेसर ढोऎंगें तपन पोटलीआओ तल में छांह ही देंगें ! क्योंकर मन में अवगुंठन है शाम सुहानी कहां प्रात बिन ?***************मोहक मादक मदिरा...
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गिरीश बिल्लोरे
गीत
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[10 May 2010 10:51 AM]



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