क्‍या था सच

रूप-अरूप अहसास बेमानी थे या शब्‍दपता नहीं,कि‍न भावों को पि‍रोकर शब्‍दों का मोती बनाया था,आज पलटती हूंगुजरा लम्‍हातो लगता हैवो शब्‍द, वो खतजि‍नमें सि‍र्फ अहसास समाए हैं,क्‍या वो सच थाया सि‍र्फ कल्‍पनाएं हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
views
34
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
9
[10 May 2010 10:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix