अरे भारत के तथाकथित सपूतों मेरा क्या उखाड़ लोगे....

दिल की कलम से... सुना है कल किसी ने मुझे मौत की सज़ा दी है...कलम के कुत्तों को भौंकने की एक और वजह दी है...भौंक लो भौंक लो जब थक कर चूर हो जाओगे...चुपचाप पुरानी गलियों के कोने मे सो जाओगे...दो दिन बंदर से उछल उछल कर मेरा क्या बिगाड़ लोगे...अरे भारत के तथाकथित सपूतों मेरा... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[10 May 2010 10:01 AM]

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