स्वयं सिद्धा बन जाओ

गीत............... नारी - तुम कब खुद को जानोगी कब खुद को पहचानोगी ?  कुंठाओं से ग्रसित हमेशा खुद को शोषित करती हो अपने ही हाथों से खुद की  गरिमा भंगित करती हो  पुरुषों को ही लांछित कर खुद को ही भरमाती हो पर मन के विषधर... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[10 May 2010 09:10 AM]

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