मदर्स-डे पर मेरे उपन्यास ‘बूढ़ी डायरी’ का एक अंश

अशोकनामा Share बाबूजी के चले जाने के बाद हवेली का मौन सहन करना असम्भव हो गया था।हमारी हवेली में उदासी का साम्राज्य स्थापित हो गया और हमारे बीच भी मौन आकर ठहर गया।        लेकिन हर बार की तरह तुमने एक दिन मौन को हरा ही... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक

उपन्यास

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[10 May 2010 08:00 AM]

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