अब अपराधी कौन?
राह पकड़ तू एक चला-चल, मिल जाएगी मधुशाला. प्रख्यात कवि श्री हरिवंशराय बच्चन जी की मधुशाला की यह प्रसिद्द पंक्ति उन सबो के लिए है जो अपने उसूलों के रास्ते बिना बदले चलते-चलते अपने निर्धारित लक्ष्य पर पहुँच जाते है. लेकिन उन राजनेताओं का क्या करे जो सुबह,...
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Amar Singh
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[10 May 2010 06:35 AM]



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