मन के अँगना में फलक तन्हा है

गीत-ग़ज़ल जिन्दगी तुझको जब भी देखा मैंनेइक मुखौटे को तेरे हाथ से छीना मैंने मन के अँगना में फलक तन्हा हैचाँद सूरज की तरह उनको उतारा मैंने मुड़ के देखा नहीं कभी पीछेजिन्दगी तुझसे बहुत प्यार किया है मैंने साथ देती नहीं परछाई भीफिर भी हर लम्हा ऐतबार किया है मैंनेहर... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[10 May 2010 05:41 AM]

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