किसी को बना दे किसी को मिटा दे
किसी को बना दे किसी को मिटा दे खुदा है कि क्या है मुझे तू बता दे अगर है मुहब्बत किसी दिन जता दे कभी देख मुझको ज़रा मुस्कुरा दे मिटा दो रिवाजों को रस्मों को यारों मुहब्बत करे और फिर भी दगा दे दिला दे हमें याद फिर वो...
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jogeshwar garg
ghazal
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[10 May 2010 04:27 AM]



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