‘सम्मान के लिए हत्या’ या सम्मान की हत्या?
पंचयतों के प्रपंच से प्रताडित होता प्रेम-राजेश त्रिपाठीइनसान की प्रगति के कदमों ने चांद की सतह तक को छू लिया है। अब उसकी परवाज दूसरे अजाने ग्रहों के रहस्य भेदने की ओर है लेकिन उनका अपना खूबसूरत ग्रह धरती कुरीतियों, कुसंस्कारों और रूढ़ियों से दिन ब दिन...
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Rajesh Tripathi
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[10 May 2010 02:51 AM]



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