आँच गर ज्यादा करोगे रोटियाँ जल जाएँगी
मत हवा दो, अध-बुझी चिंगारियाँ जल जाएँगी आग जो भड़की दिलों में, पीढ़ियाँ जल जाएँगीख़ुद-परस्ती की शमाँ से यूँ न घर रोशन करोबेगुनाहों की अनेकों बस्तियाँ जल जाएँगी फेंकते हो प्यार के दरिया में नफरत की मशाल ! लग गई जो आग सारी कश्तियाँ जल जाएँगीबैठ ऊँची...
[पूरी पोस्ट]
प्रताप नारायण सिंह
11
1
0
1
2
[10 May 2010 02:31 AM]



Shuffle








