संत कबीर के दोहे-कपटी कभी साधु नहीं बनते (kapti kabhi sadhu nahin hote-kabir ke dohe)
चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंसते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि जो लोग चाल तो बगुले की चलते हैं और अपने आपको हंस कहलाते हैं, भला ज्ञान के मोती कैसे चुन सकते हैं? वह तो काल के फंदे में ही फंसे रह जायेंगे। जो...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
9
0
0
0
0
[09 May 2010 23:22 PM]



Shuffle







