चिट्ठे को भी सोशियल नेटवर्किंग बना दिया है
कल मदर्स डे के मौके पर रवि रतलामीजी चर्चा की थी उसमें कल तक प्रकाशित पोस्टों के जिक्र किये थे। देखियेगा।इस मौके पर बोधिसत्व ने भी कवितायें पोस्ट कीं। एक में वे अपनी मां से दिल्ली के नाम पर दिल्लगी करते हैं:माँ,अगर बनी रही दिल्लीतो दिल्लगी नहीं करता मैंघर...
[पूरी पोस्ट]
अनूप शुक्ल
अनूप शुक्ल
35
2
1
1
12
[09 May 2010 22:55 PM]



Shuffle







