नोंक-झोंक
दफ्तर से घर पहुँचकर श्रीमान जी ने श्रीमती जी को आवाज़ लगाते हुए कहा, “दिन भार फइलों में सर खपाते-खपाते मैं तो आधा पागल हो गया हँ।” श्रीमतीजी जो रसोई में काम कर रही थीं वहीं से बोलीं, “कोई भी काम तो पूरा कर लिया करो।”...
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हास्यफुहार
नोंक-झोंक
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[09 May 2010 22:04 PM]



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