चर्चा - लाज न आवत आपको
गत दिनों स्त्रीविमर्श, ऋषभ की कविताएँ और हिंदी-भारत समूह पर एक छोटी-सी कविता दी थी - लाज न आवत आपको, विस्मय कि उसपर काफी चर्चा हो गई. कवि का अपना पाठ तो कविता है, यों अपनी ओर से कुछ नहीं कहना है. लेकिन पाठक कि रचना धर्मिता और किसी भी रचना के अनेक पाठों...
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ऋषभ Rishabha
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[09 May 2010 18:26 PM]



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