माँ के लिए एक ख़त

हिन्द-युग्म माँ! कहने को इस शहर से रिश्तासाल भर का हो गया हैअब तक तो इसे चलना सीख लेना थापर जाने क्यूँ माँइसे बीमारी लग गई है, अकेलेपन कीऔर ये रिश्ता, अपाहिज हो गया हैसोचा था इस शहर के रिश्ते से नए रिश्ते मिलेंगे, मगरयहाँ रिश्ते मोबाइल में बंद रहते हैंएसएसएस पर पलते... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

deepali aab

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[09 May 2010 14:41 PM]

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