मदर्स डे के बहाने
ये जानते हुये भी कि जीवन रचने की अनूठी शक्ती सिर्फ औरत के हिस्से आयी है, और पालन पोषण की जिम्मेदारी भी. फिर भी औरत की कोख पर उसका अधिकार नहीं है, स्त्री का माँ रूप सिर्फ एक ख़ास सन्दर्भ में ही स्वीकार्य है, बाकी वों लगातार स्त्री के लिए अपमान और बंधन और...
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स्वप्नदर्शी
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[09 May 2010 12:19 PM]



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