मेरी माँ
-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ चिड़ियों के जगने से पहले जग जाती थी मेरी माँ । ढिबरी के नीम उजाले में पढ़ने मुझे बिठाती माँ । उसकी चक्की चलती रहती कोई गीत न गाती माँ । गाय दूहना, दही बिलोना सब कुछ करती जाती माँ । सही वक़्त पर बना नाश्ता जीभर मुझे खिलाती माँ...
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सहज साहित्य
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
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[09 May 2010 11:30 AM]



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