माँ की ममता का नहीँ कोई शुमार
माँ की ममता का नहीँ कोई शुमारडा. अहमद अली बर्क़ी आज़मीमाँ की ममता का नहीँ कोई शुमारमाँ है सन्ना-ए-अज़ल का शाहकारमाँ से है गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ बहारमाँ है ऐसा गुल नहीँ है जिसमेँ ख़ारमाँ का कोई भी नहीँ नेअमल बदलयह हक़ीक़त है सभी पर आशकारमाँ है वह...
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Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi
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[09 May 2010 09:50 AM]



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