हलवा खाने की ज़िद और एक माँ की मजबूरी....

दिल की कलम से... एक माँ चटाई पे लेटी आराम से सो रही थी...कोई स्वप्न सरिता उसका मन भिगो रही थी...तभी उसका बच्चा यूँही गुनगुनाते हुए आया...माँ के पैरों को छूकर हल्के हल्के से हिलाया...माँ उनीदी सी चटाई से बस थोड़ा उठी ही थी...तभी उस नन्हे ने हलवा खाने की ज़िद कर दी...माँ... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[09 May 2010 08:30 AM]

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