तरक्की और कामयाबी-हिन्दी शायरी

 हिन्द केसरी-पत्रिका अपनी मदद खुद कर सको, उतना ही आगे जाना। तरक्की और कामयाबी के ख्वाब में यूं न खो जाना।। बिकते हैं सपने बाज़ार में, मु्फ्त का खेल दिखाकर, तरक्की के रास्ते चल, उधार के जाल में न फंस जाना ।। ———– मोहब्बत शादी के अंजाम तक आशिक और माशुका... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[09 May 2010 06:43 AM]

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