याद है जख्मों पे तू अक्सर मरहम लगाती थी.....

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की लीजिये  जनता... एक रचना.. बैठे बैठे बस बन पड़ी, ज्यादा कुछ सोचा नहीं और ना ही ज्यादा दिमाग लगाया... शब्द ढूंढे, कड़ियाँ ढूंढी उनको जोड़ा और लिख दिया...तेरी यादों को जब तलक सोचता रहा, तेरे अक्स को तब तलक खोजता रहा.पहले भी तो तन्हा ही रहा करता था,पर... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[09 May 2010 07:00 AM]

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