बेसन की सोंधी रोटी

तुम किसकी माँ हो मेरी मातृभूमि बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी-जैसी माँ याद आती है चौका बासन चिमटा, फुकनी जैसी माँ बान की खुर्रि खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे आधी सोई आधी जागी थकी दोपहरी जैसी माँ चिड़ियों की चहकार में गूँजे राधा-मोहन, अली-अली मुर्गे की आवाज से खुलती घर की कुंडी जैसी... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतोष पार्थेश्वर
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[09 May 2010 06:05 AM]

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