अब के जो..........

Shikha Deepak अब के जो बिखरी तो न सँवरूंगी कभीअपने हाथों से बनी खुद अपनी ही तकदीर हूँरंग ले के लहू से नमी अश्कों सेखुद अपने में रंग भरती आप अपनी ही तस्वीर हूँजिनके पूरा होने की तमन्ना में हाँथ उठे ही रहेअपनी ऐसी अनसुनी दुआओं की ताबीर हूँजितनी बार आज़माओगे मुझे वैसा ही... [पूरी पोस्ट]
writer Shikha Deepak
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[09 May 2010 05:51 AM]

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