अपनी माँ का मुखड़ा : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

सरस पायस ♥♥अपनी माँ का मुखड़ा मुझको सबसे अच्छा लगता - अपनी माँ का मुखड़ा! कल-कल करती नदिया अच्छी, पंछी की सुरलहरी अच्छी, हर मंदिर की घंटी अच्छी, मेघों की सरगम भी अच्छी! लेकिन मुझको अच्छी लगती - अपनी माँ की मीठी... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

बालगीत

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[09 May 2010 04:56 AM]

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