'कैसे दीवाने'
साए साए रहे, साए साए पले, धूप से की दोस्ती, तो चांदनी से जले,चमकती रौशनी से, डर था, टूटेंगे ख्वाब आशियाँ जा कर बनाया ,हमने चरागों के तले, खो गए राह में, धूल के मानिंद भी, कभी हवाओं सा उड़े, कभी रुक गए, कभी फिर चले,हमें...
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योगेश शर्मा
'कैसे दीवाने'
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[09 May 2010 04:22 AM]



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