कैसे तुम मुझे मिल गई थी.
कैसे तुम मुझे मिल गई थी..मैं तो बद-किस्मती से समझोता कर चुका था..खुदा के दर से भी खफा हो चुका था..मौत का रास्ता चुन चुका था..इस तन्हा दुनिया से विरक्त हो चला था..अपने नसीब पर भी बे-इन्तहा रो चुका था..अब और कोई आस बाकी ना बची थी..जीने की आरजू भी ख़तम हो...
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अनामिका की सदाये......
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[09 May 2010 04:17 AM]



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