रात और मेरे बीच
रात,से एक अजीब सा रिश्ता है मेरा वह रखती है सहेजकर गलियों में बिखरे शब्दों को मेरे लिये जो लोग अपनी कहानी पूरा करने के पहले छोड़ गये थे औरउंड़ेल देती है मेरे सामने उस प्रहर जब कोई नही होता हमारे बीच / साथ मैं,उन्ही शब्दों से लिखता हूँ जब गीत कोई तो महसूस...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[09 May 2010 03:48 AM]



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